Wednesday, January 31, 2018

ICC U-19 Cricket World Cup hero Shubman Gill ‘new Yuvraj Singh’ of Punjab cricket

HT, 31st January 2018
With an aggregate of 341 runs in the ongoing ICC U-19 Cricket World Cup, Shubman Gill from the town of Fazilka in Punjab's Ferozepur district has been the center of attention, even more than the skipper Prithvi Shaw, and has drawn comparisons with Yuvraj Singh.

A heady mixture of silken grace and dollops of brute power has always defined Punjab school of batsmanship and the latest to have emerged from that stable is 18-year-old Shubman Gill.

With an aggregate of 341 runs in the ongoing U-19 World Cup, the teenager from non descript town of Fazilka in Punjab's Ferozepur district has been the centre of attention, even more than the highly-rated skipper Prithvi Shaw.

Strapping with sinewy wrists, Shubman's exciting strokeplay has earned him eyeballs and no wonder he went to Kolkata Knight Riders for a bid of Rs 1.8 crore at the IPL auction.


Nathan Lyon to captain Australia's PM XI in Twenty20 against England
Pointless comparing Hardik Pandya with Kapil Dev: Mohammed Azharuddin

It was around 10 days ago when India were playing their second group league game of the World Cup against Zimbabwe at Mount Maunganui, Shubman pulled rival pacer N Nungu for a six over deep mid-wicket.

It was a short-arm jab but more interestingly there was an eerie similarity with a stroke that Virat Kohli had hit during his innings of 150 against England in an ODI in Pune, last January.

In fact, the BCCI's official website compared both the strokes and it spoke about the skill and swagger which have been the hallmark of all great players hailing from North India.

During the days of Mohinder Amarnath and Navjot Sidhu -- Punjab batting was more about grit and power but Yuvraj Singh married both. And now it seems that Shubman is ready to carry that legacy forward.

And none other than his senior Punjab team captain Harbhajan Singh, who feels that he has got everything to succeed at the highest level.

"Obviously, the more he plays quality bowling, he will improve. He will play in different conditions, go through phases where he would know how to score runs in difficult conditions. But make no mistake, I have seen 18-year-old Yuvraj Singh from close quarters, Shubman is as talented as Yuvraj," Harbhajan gave a fair assessment about the youngster.

"His biggest advantage is that he has strokes that all modern day players would like to have. He can hit Dilscoop (the lap shot made famous by TM Dilshan), he can hit the ramp shot (guiding over thirdman), inside out lofted shot.

"And the toughest of them all -- the pull in-front of square. Pulling through deep square leg is not difficult but you need to be tall with supple wrists to keep the ball down while pulling in-front of square. Shubman has that," says the veteran of 100 plus Test matches.

In fact, Shubman himself said that he would like to play all formats when former England opener Robert Key interviewed him.

"Adaptability is the key and I would like to play all three formats."

Coming from an affluent family with plethora of farmland, the legend has it that Shubman's father Lakhwinder Singh had constructed a turf pitch on his farmland, where little Shubman practiced during his early days.

फाजिल्का के शुभमन के शतक से भारत ने पाकिस्तान को रौंदा :: दादी ने शुभमन का हर बैट संभालकर रखा है

 तीन फरवरी को ऑस्ट्रेलिया के साथ होगा खिताबी मुकाबला

जेएनएन, नई दिल्ली : पंजाब के फाजिल्का में जन्मे और मोहाली में रहने वाले शुभमन गिल के शानदार शतक (नाबाद 102) और ईशान पोरेल (4/17) की घातक गेंदबाजी की बदौलत भारत ने न्यूजीलैंड में खेले जा रहे अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप के सेमीफाइनल में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। टीम इंडिया ने शुक्रवार को हुए इस मैच में 203 रन से जीत हासिल की। अब तीन फरवरी को फाइनल में भारत का सामना ऑस्ट्रेलिया से होगा। टीम इंडिया ने टॉस जीतकर 50 ओवर में नौ विकेट पर 272 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तानी टीम 29.3 ओवरों में मात्र 69 रनों पर सिमट गई।अंडर-19 वल्र्ड कपशुभमन जब तीन साल का था, तभी से उसे क्रिकेट से लगाव हो गया था। जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया मैं उसके छोड़े गए बैट पर उसकी उम्र लिखकर सहेजती गई। -गुरमेल कौर, शुभमन की दादीआईपीएल में 1.80 करोड़ लगी बोली1विगत दिवस आइपीएल की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स ने शुभमन को 1 करोड़ 80 लाख रुपये में खरीदा है।'>> शुभमन इस बार विश्व कप में शतक लगाने वाले भारत के पहले बल्लेबाज 1'>>भारत रिकॉर्ड छठी बार अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में पहुंचा(विस्तृत खेल पेज पर)

दादी ने शुभमन का हर बैट संभालकर रखा है

अमृत सचदेवा/रवि वाटस'जलालाबाद (फाजिल्का)1कहते हैं कि ब्याज से प्यारा मूल होता है, कुछ ऐसा ही अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में शतक जड़कर भारत को फाइनल में पहुंचाने वाले फाजिल्का जिले के क्रिकेटर शुभमन गिल के मामले में भी है। पाकिस्तान पर भारत की 203 रन की धमाकेदार जीत से शुभमन के पैतृक गांव जयमलवाला में खुशी की लहर दौड़ गई है। शुभमन के दादा-दादी पूरी तरह क्रिकेट में रंग में रंगे नजर आए। टीम में बतौर वाइस कैप्टन खेल रहे शुभमन ने जहां भारत को फाइनल में पहुंचाकर अपने गृह जिले के नाम रोशन किया है। वहीं, गत दिवस आइपीएल में लगी बोली में एक करोड़ 80 लाख रुपये में शाह रुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स में भी चुनकर दोगुनी खुशी जिला वासियों को दी है।1मोहाली में पिता ने करवाई प्रेक्टिस : फाजिल्का के होनहार खिलाड़ी शुभमन का इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। इसके पीछे जहां शुभमन की कड़ी मेहनत है वहीं उसके माता-पिता की कुर्बानी ने भी अहम रोल अदा किया है। एक समय ऐसा था जब अपना खेत खलिहान व गांव छोड़कर बेटे का क्रिकेट में भविष्य बनाने के लिए गिल दंपती मोहाली चले गए, लेकिन शुरुआती चार साल बहुत मुश्किल से बीते। मोहाली क्रिकेट एसोसिएशन का क्रिकेट मैदान जो पंजाब के क्रिकेटरों के लिए मक्का से कम नहीं है, में शुभमन को प्रेक्टिस के लिए जगह नहीं मिल पाती थी। कोई साथी नहीं था। शुभमन के पिता लख¨वदर गिल बताते हैं कि ऐसे वक्त में वह खुद बालिंग कर अपने बेटे का प्रेक्टिस करवाते थे। आज अपनी मेहनत के बूते शुभमन ने वो मुकाम हासिल कर लिया है जिस ऊंचाई का सपना उन्होंने कभी देखा था।1बचपन से ही था क्रिकेट का जुनून : शुभमन के दादा दीदार सिंह व दादी गुरमेल कौर टीम इंडिया की जीत के बाद गांव जयमल वाला में मिठाई बांटकर खुशी मनाई। दादी गुरमेल कौर ने शुभमन की ओर से बचपन में क्रिकेट खेलने के लिए खरीदे सभी बैट संभालकर रखे हैं। दादी गुरमेल कौर ने बताया कि शुभमन तीन साल का था, तभी उसे क्रिकेट की लगन लग गई थी। जैसे-जैसे बड़ा होता गया, दादी उसके द्वारा छोड़े गए बैट पर उसकी उम्र लिखकर उसे सहेजती गई। वहीं शुभमन को मिल रही कामयाबी से खुशी दादा दीदार सिंह गिल घर में ही पिच बनाकर आने-जाने वाले के साथ क्रिकेट खेलने में मशगूल हो गए हैं।1अंडर-16 में शुभमन के नाम वल्र्ड रिकार्ड : शुभमन के पिता लख¨वदर सिंह व माता किरत कौर गिल ने बताया कि उनके लिए वह क्षण काफी गौरवमयी थे, जब शुभमन अंडर-16 के मैच मोहाली टीम से खेलता था। तब उसने पीसीए के इंटर डिस्टिक्ट मैच में सबसे पहली ओपनिंग पार्टनरशिप 587 रनों वाली की थी। अंडर-16 में अमृतसर के खिलाफ खेलते हुए शुभमन ने 365 रन व रोपड़ के खिलाफ नॉटआउट रहते हुए 405 रन की पारी खेली थी, जो कि वल्र्ड रिकार्ड है। उन्हीं दो वर्षो में शुभमन को लगातार आल इंडिया बेस्ट क्रिकेटर बीसीए की ओर से चुना गया। उसके बाद उसने जोन स्तरीय मुकाबलों के चार मैच में 700 से अधिक रन बनाए। सीनियर टीम इंडिया के साथ हुए एक वनडे टूर्नामेंट के पहले मैच में शुभमन रन आउट हो गया था। वहीं दूसरे मैच में जबरदस्त वापसी करते हुए युवराज के साथ खेलते हुए सैकड़ा जमाया था। इस साल रणजी मैच में भी शुभमन शतक जमा चुके हैं। अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ शतक ठोककर शुभमन ने अपने जिले के लोगों का मान बढ़ाया है।अमृत सचदेवा/रवि वाटस'जलालाबाद (फाजिल्का)1कहते हैं कि ब्याज से प्यारा मूल होता है, कुछ ऐसा ही अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में शतक जड़कर भारत को फाइनल में पहुंचाने वाले फाजिल्का जिले के क्रिकेटर शुभमन गिल के मामले में भी है। पाकिस्तान पर भारत की 203 रन की धमाकेदार जीत से शुभमन के पैतृक गांव जयमलवाला में खुशी की लहर दौड़ गई है। शुभमन के दादा-दादी पूरी तरह क्रिकेट में रंग में रंगे नजर आए। टीम में बतौर वाइस कैप्टन खेल रहे शुभमन ने जहां भारत को फाइनल में पहुंचाकर अपने गृह जिले के नाम रोशन किया है। वहीं, गत दिवस आइपीएल में लगी बोली में एक करोड़ 80 लाख रुपये में शाह रुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स में भी चुनकर दोगुनी खुशी जिला वासियों को दी है।1मोहाली में पिता ने करवाई प्रेक्टिस : फाजिल्का के होनहार खिलाड़ी शुभमन का इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। इसके पीछे जहां शुभमन की कड़ी मेहनत है वहीं उसके माता-पिता की कुर्बानी ने भी अहम रोल अदा किया है। एक समय ऐसा था जब अपना खेत खलिहान व गांव छोड़कर बेटे का क्रिकेट में भविष्य बनाने के लिए गिल दंपती मोहाली चले गए, लेकिन शुरुआती चार साल बहुत मुश्किल से बीते। मोहाली क्रिकेट एसोसिएशन का क्रिकेट मैदान जो पंजाब के क्रिकेटरों के लिए मक्का से कम नहीं है, में शुभमन को प्रेक्टिस के लिए जगह नहीं मिल पाती थी। कोई साथी नहीं था। शुभमन के पिता लख¨वदर गिल बताते हैं कि ऐसे वक्त में वह खुद बालिंग कर अपने बेटे का प्रेक्टिस करवाते थे। आज अपनी मेहनत के बूते शुभमन ने वो मुकाम हासिल कर लिया है जिस ऊंचाई का सपना उन्होंने कभी देखा था।1बचपन से ही था क्रिकेट का जुनून : शुभमन के दादा दीदार सिंह व दादी गुरमेल कौर टीम इंडिया की जीत के बाद गांव जयमल वाला में मिठाई बांटकर खुशी मनाई। दादी गुरमेल कौर ने शुभमन की ओर से बचपन में क्रिकेट खेलने के लिए खरीदे सभी बैट संभालकर रखे हैं। दादी गुरमेल कौर ने बताया कि शुभमन तीन साल का था, तभी उसे क्रिकेट की लगन लग गई थी। जैसे-जैसे बड़ा होता गया, दादी उसके द्वारा छोड़े गए बैट पर उसकी उम्र लिखकर उसे सहेजती गई। वहीं शुभमन को मिल रही कामयाबी से खुशी दादा दीदार सिंह गिल घर में ही पिच बनाकर आने-जाने वाले के साथ क्रिकेट खेलने में मशगूल हो गए हैं।1अंडर-16 में शुभमन के नाम वल्र्ड रिकार्ड : शुभमन के पिता लख¨वदर सिंह व माता किरत कौर गिल ने बताया कि उनके लिए वह क्षण काफी गौरवमयी थे, जब शुभमन अंडर-16 के मैच मोहाली टीम से खेलता था। तब उसने पीसीए के इंटर डिस्टिक्ट मैच में सबसे पहली ओपनिंग पार्टनरशिप 587 रनों वाली की थी। अंडर-16 में अमृतसर के खिलाफ खेलते हुए शुभमन ने 365 रन व रोपड़ के खिलाफ नॉटआउट रहते हुए 405 रन की पारी खेली थी, जो कि वल्र्ड रिकार्ड है। उन्हीं दो वर्षो में शुभमन को लगातार आल इंडिया बेस्ट क्रिकेटर बीसीए की ओर से चुना गया। उसके बाद उसने जोन स्तरीय मुकाबलों के चार मैच में 700 से अधिक रन बनाए। सीनियर टीम इंडिया के साथ हुए एक वनडे टूर्नामेंट के पहले मैच में शुभमन रन आउट हो गया था। वहीं दूसरे मैच में जबरदस्त वापसी करते हुए युवराज के साथ खेलते हुए सैकड़ा जमाया था। इस साल रणजी मैच में भी शुभमन शतक जमा चुके हैं। अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ शतक ठोककर शुभमन ने अपने जिले के लोगों का मान बढ़ाया है।

Dainik Bhaskar, Ferozpur Edition, Page 1, 31st January 2018

#ShubhmanGill #ICCWCU19

Friday, January 26, 2018

Fazilka district launches mission Sanjhedari with Indian Army for training youths

FAZILKA: Coinciding with the 69th Republic Day, Fazilka district administration launched the mission Sanjhedari(collaboration) with the Indian Army to provide training to youths. The first batch of 55 youth started their training under the mission on Thursday. Deputy Commissioner Isha Kalia said that "Mission Sanjhedari has been launched to motivate the youth to join the military. Fazilka being a border district the presence of Army in the area has a deep impression on the youth of the area. The youths are well aspired to join the Army but it was observed that youngsters did not know how to proceed with its preparation to join Army". The Mission Sanjhedari will shape the dreams of the youth of this border district, she added.

Deputy Commissioner said that in a first step we will find out the youths who want to join Army. Shortlisted candidates would undergo a preliminary fitness test conducted under the supervision of officers of CPYT Ferozpur. The selected candidates would be given one-month training for recruitment in collaboration of Army.

She appealed to the youth of the district to have maximum recruitment in the Indian army so that they can contribute in the service and security of the country.

Brigadier in Indian Army Gaurav Sharma said Indian Army is a mission. One can serve his country by joining this prestigious force of the world. He said there is no shortcut in life and one can achieve his goal only with hard work. The army would provide its full support to the project of district administration.

Monday, December 18, 2017

Sonu Sood honoured with Punjab Ratan award

Governor of Punjab, V P Singh Badnore, honoured the actor at an event at Fazilka in Punjab.

Dec 18, 2017 || Press Trust of India, Mumbai || Hindustan Times
Actor Sonu Sood was honoured with Punjab Ratan award for his contribution to the welfare of people of Punjab

Actor Sonu Sood has received the Punjab Ratan award for his contribution to the welfare of people of Punjab, specially his hometown, Moga.

Governor of Punjab, V P Singh Badnore, honoured the actor at an event at Fazilka in Punjab.

During the ceremony, the 44-year-old actor also paid homage to the soldiers who fought the 1971 Indo-Pak war.

"I feel really honoured to get Punjab Ratan award from the governor of Punjab and that too at a venue which was full of the families of the martyrs in the 1971 war and several Majors, Colonels and soldiers who fought that war were also present," he said.

"It was a great honour. I can relate to it more because I just finished for one schedule of J P Dutta's 'Paltan' where I'm playing a Major and was in the uniform for two months. Meeting those families and people, who sacrificed their lives for their nation, was a huge honour. I feel blessed. It was all possible because of the blessings of my parents," Sonu said in a statement.

Monday, December 4, 2017

225 सैनिकों ने शहादत देकर बचाया था फाजिल्का सेक्टर : आज श्रद्धांजलि पर विशेष

25 सैनिकों ने शहादत देकर बचाया था फाजिल्का सेक्टर || आज श्रद्धांजलि पर विशेष 

शहीद मेजर नारायण सिंह को पाक सेना ने भी सलामी दी थी

3 दिसंबर 1971 में पाक सेना को रोकने के लिए भारतीय सेना ने उड़ाया था गांव बेरीवाला का पुल

संजीव झांब | फाजिल्का

3दिसंबर 1971 फाजिल्का सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे गांवों के लिए कभी भूलने वाला दिन है। 1971 के भारत-पाक युद्ध का सर्वाधिक भीष्म युद्ध इसी सेक्टर में हुआ था। 3 दिसंबर की शाम पाकिस्तानी गोले फाजिल्का के सीमावर्ती गांवों में ताबड़तोड़ बरस रहे थे। लोग पहले ही पलायन कर चुके थे। पाकिस्तानी सेना टैंकों के साथ लगातार आगे बढ़ रही थी। 3 अासाम रेजीमेंट, 15 राजपूत और 67 इनफेंट्री ब्रिगेड के जवानों ने इनका बहादुरी से मुकाबला किया। सेना ने 4 जाट रेजीमेंट के जवानों को भी युद्ध क्षेत्र में उतार दिया। बढ़ रही पाक सेना को रोकने के लिए भारतीय सेना ने गांव बेरीवाला के पुल को उड़ा दिया। दोनों तरफ लगातार गोले बरस रहे थे। भारतीय सेना का नेतृत्व मेजर नारायण सिंह कर रहे थे और पाक सेना का मेजर शब्बीर शरीफ। मेजर नारायण िसंह ने 8 पाक सैनिकों को मौत के घाट उतारा। युद्ध में मेजर नारायण िसंह समेत सेना के लगभग 225 जवान शहीद हुए। 450 के करीब जख्मी।
1970 के युद्ध में पाक सेना को रोकने के लिए गांव बेरीवाला की ड्रेन पर बना यही पुल सेना ने उड़ाया था। तब से अब तक गांव के लोग इसकी मुरम्मत करा इस्तेमाल कर रहे हैं। बता दें, बॉर्डर एरिया में ड्रेन पर बने पुल पक्के नहीं बनाए जा सकते। लकड़ी से ही बनाया जाता है ताकि किसी खतरे में इसे आसानी से उड़ाया जा सके। ऊपर फोटो में शरमाना टैंक, जिसे पाक सेना से छीना गया था।
भारतीय सेना की तरफ से मेजर नारायण सिंह को मरणोपरांत वीरचक्र से सम्मानित किया गया। युद्ध विराम के बाद जब पाकिस्तान की तरफ से शहीद सैनिकों के शव भारतीय सेना को सौंपे गए तो तब पाक सेना के अधिकारियों ने मेजर नारायण सिंह को उनकी बहादुरी के लिए सलामी दी थी। शहीद सैनिकों का सामूहिक अंतिम संस्कार गांव आसफवाला में 90 फीट लंबी तथा 55 फुट चौड़ी चिता बनाकर किया गया था। शहीदों के बलिदान से प्रभावित फाजिल्का के लोगों ने उनकी याद में एक स्मारक का निर्माण किया। हर साल यहां शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
मेजर नारायण िसंह ने 8 पाक सैनिकों को मौत के घाट उतारा था

Dainik Bhaskar, Page 2, Ludhiana Edition, 3rd December 2017

सरकारी व निजी इमारतों का सुंदरता को दाग लगा रहे पोस्टर

पर नगर कौंसिल अवैध पोस्टरों के खिलाफ नहीं कर रहा कार्रवाई

अमृत सचदेवा' : फाजिल्का शहर में सार्वजनिक जगहों पर पोस्टर चिपकाने पर लगने वाला पब्लिसिटी टैक्स का ठेका चढ़ा होने के बावजूद ठेका उठाने वाले ठेकेदार द्वारा केवल अपनी कमाई पर ध्यान दिलाया जा रहा है, जबकि शहर की सुंदरता बिगाड़ने वाले पोस्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। जबकि फ्लैक्स से ज्यादा शहर की सुंदरता के लिए खतरनाक पोस्टर हैं, जिन्हें धड़ल्ले से सरकारी इमारतों, सार्वजनिक जगहों व निजी संपत्तियों पर चिपकाकर शहर को बदसूरत बनाया जा रहा है।1बता दें कि फाजिल्का नगर कौंसिल से शहर में इश्तिहारबाजी का ठेका ब¨ठडा की किसी फर्म ने ले रखा है। इस फर्म से नगर कौंसिल को सालाना करीब आठ लाख रुपये की कमाई हो रही है। ठेकेदार नगर कौंसिल को ठेका राशि देकर अपनी कमाई तो कर रहा है, मगर शहर की सूरत को बिगाड़ रहा है, क्योंकि वह सरकारी, निजी व सार्वजनिक संपत्तियों पर पोस्टरों को चिपका रहा है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।1पोस्टरों से पटे चौक : नगर कौंसिल ने ठेका राशि से कमाई कर ली और ठेकेदार बड़े-बड़े फ्लैक्स विज्ञापनों या नगर कौंसिल द्वारा चिन्हित दर्जनों जगहों पर लगाए गए यूनिपोल के जरिये होने वाली पब्लिसिटी से कमाई कर रहा है लेकिन बड़ी कमाई के बीच न तो नगर कौंसिल और न ही ठेकेदार शहर की सार्वजनिक जगहों, सरकारी इमारतों, खंभों, बेरीकेडस व निजी इमारतों पर चिपकाए जा रहे पोस्टरों की अनदेखी कर रहे हैं। फाजिल्का के घंटाघर चौक, शास्त्री चौक, मेहरियां बाजार, बिजली घर व अन्य तमाम जगहों पर लोगों ने अपने समारोहों, विभिन्न आयोजनों, अपने प्रतिष्ठानों के प्रचार के लिए पोस्टर चिपका रखे हैं। सबसे ज्यादा पोस्टर धार्मिक संगठनों के चिपकाए गए हैं, जो धर्म के नाम पर ठेकेदार व नगर कौंसिल को अपने द्वारा लगाए जाने वाले फ्लैक्स बोर्ड की बनती फीस देने में आनाकानी करते हैं, बल्कि फ्लैक्स बोर्ड में मिली छूट का फायदा अपने आयोजनों के पोस्टर जगह-जगह चिपकाकर शहर का हुलिया बिगाड़ते हैं।1फाजिल्का के घंटाघर परिसर पर अवैध रूप से चिपकाया गया वोटर जागरुकता का पोस्टर (दाएं) फाजिल्का के घंटाघर बाजार में पावरकॉम के मीटर बॉक्स पर चिपके अवैध पोस्टर' जागरणफाजिल्का के सर्राफा बाजार में नगर कौंसिल के कार फ्री जोन की बेरीकेडिंग पर चिपगाए गए धार्मिक समारोह के पोस्टर, जिसके पीछे नगर कौंसिल के बेरिकेडिंग पर लिखा संदेश भी छिप गया है।सरकारी संगठन भी नहीं हैं पोस्टरबाजी में पीछे1कोई कमर्शियल संस्थान या फिर एनजीओ अपने पोस्टर तो शहर में नगर कौंसिल की मंजूरी के बिना लगाती ही हैं। साथ ही प्रशासनिक कार्यक्रमों व विभिन्न योजनाओं के पोस्टर भी सार्वजनिक जगहों पर चिपकाकर शहर की सुंदरता बिगाड़ने में पीछे नहीं हैं। इन दिनों वोटर जागरुकता के पोस्टर भी जगह-जगह सरकारी व निजी इमारतों पर चिपके देखे जा सकते हैं। इस बारे में नगर कौंसिल के सुपरिंटेंडेंट राजेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पोस्टर हटाने का जिम्मा ठेकेदार का है। ठेकेदार अवैध पोस्टरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता तो कौंसिल उससे जवाब तलब करेगी।

Monday, September 25, 2017

Camel Safari expedition reaches Fazilka covering 1052 KMs distance

Fazilka, September 23, 2017:  Camel Safari expedition by 20 brave women  squad of Border Security Force and Air Force, on International Balika Divas via Hindu Mal Kot, was given a warm welcome on entry the Punjab territory, after covering 1052 KMs, to make people aware about gender discrimination and Beti Bachao beti Padhai Abhiyan.

Among those who welcomed the Camal Safari on the international border were Commandant Murari Parshad Singh, Assistant Commandant Narender Singh Bhati and Deputy Commandant, J.R,Choudhary besides Sarpanch Mahender Singh Bhobhria along with number of prominent persons of border village Roopnagar were present.

It may be mentioned that the concept of joint Camal Safari by BSF and Air Force was given by Prime Minister Narendra Modi to give a message of 'Beti Bachao, Beti Padhao' in the border villages.

Today, the Camal Safari entered the Punjab after covering 443 KMs in Gujarat  and 609 KMs in Rajasthan along with Pakistan border.  They will cover another 316 KMs distance to reach on Gandhi Jayanti at Attari border.

Welcoming the Camel Safari, Commandant Murari Parshad Singh said, the mission of expedition will be successful, if 5 to 10 percent of daughters of villages are motivated.

He said, BSF is already working various social events in the border villages to put them wiser about the pluses and minuses of illiteracy, superstitions besides touching the issues of Swachh Bharat and Beti Bachao and Beti Padhao and have high expectations on reaching of Camel Safari in border village Bekanwala.

Monday, September 18, 2017

TAPI remains of high regional importance


By Kamila Aliyeva

The energy-rich Turkmenistan is eager to successfully deliver the multi-billion dollars Turkmenistan-Afghanistan-Pakistan-India (TAPI) gas pipeline project, which has been in the making for nearly three decades.

The pipe will link the regions of Central Asia and South Asia and transport up to 33 bcm of natural gas. Turkmen gas will help cover the growing need for blue fuel in India and Pakistan, where by 2030, the needs could jump up by half. The pipe will also reduce the constant shortage of energy resources in transit Afghanistan.

The construction of the Turkmen section of the TAPI was launched in December 2015. The total length of the pipeline is 1,814 kilometers, including 214 kilometers - on the territory of Turkmenistan, 774 kilometers - Afghanistan, 826 kilometers of Pakistan to the settlement of Fazilka on the border with India.

The trans-regional energy project expected to be inaugurated in 2019 is being hailed as a major initiative for bringing peace and enhancing connectivity in the region.

The construction pace and importance of TAPI was mulled at latest meeting between Afghan President Mohammad Ashraf Ghani and his Turkmen counterpart Gurbanguly Berdimuhamedov on September 17.

Ghani stated that the large-scale projects such as the Turkmenistan-Afghanistan-Pakistan-India initiated by Ashgabat will be an invaluable contribution to the peaceful settlement of the situation in Afghanistan and the sustainable social and economic development of the entire Central Asian region.

Turkmenistan, a de-facto leader of the project, will hold an international tender for the purchase of pipes and other equipment necessary for the TAPI pipeline construction in September 2017.

Preparations are also being made for the projects of the gas compressor station and other associated facilities that will be built on the pipeline route.

Currently, the Turkmen section of the gas pipeline is being laid in line with the schedule. The pipeline will run from Galkynysh – the largest gas field in Turkmenistan – through the Afghan cities of Herat and Kandahar, and finally reach the Fazilka settlement located near the India-Pakistan border.

Time frame for the Afghan and Pakistani sections of the pipeline construction has not yet been determined.

Nevertheless, the TAPI Pipeline Company Limited consortium developing the project has signed a contract with German ILF Beratende Ingenieure GmbH for the provision of services for the preliminary design and management of the project in Afghanistan and Pakistan. The technical work in the territory of these states has already started.

Why TAPI is of high regional importance?

Turkmenistan is a landlocked country with huge gas reserves. The three main export routes include Central Asia – Center Pipeline (CAS) to Russia, Central Asia – China pipeline (CACP) and two routes to Iran which are Korpedzhe-Kurt Kui (KKK) and Dauletabad-Sarakhs-Khangiran pipelines.

Turkmenistan lost Russia as a customer a year ago, and has since provided gas only to China and Iran. The country's relations with Iran were also seriously damaged by the gas dispute over Iran's debts. China remains Turkmenistan's biggest consumer.

However, Turkmenistan doesn't want to be solely reliant on a single customer. Therefore, the Central Asian country began to look for alternative consumers in the European and Asian markets.

The TAPI will make it possible to deliver gas from Turkmenistan, which ranks fourth in the world for its gas reserves, to large and energy starved markets of South and Southeast Asia.

The pipeline also has the potential to contribute to reconciliation in Afghanistan, by creating economic opportunity for the Afghan people. It could create jobs in the war-torn country.

The project also could help to improve relations between India and Pakistan reducing chances of conflict between these two nuclear powers.

From India's perspective, TAPI project will provide an alternative supply source of gas with dependable reserves leading to enhanced energy security. It will further diversify the fuel basket to the benefit of Indian economy as it would be used mainly in power, fertilizer and city gas sectors.

The main pitfalls for project's implementation

One of the main problems for the project's implementation lies in security issue as the pipeline is to pass through the territory of Afghanistan. Moreover, any downturn in India-Pakistan relation, while there is no guarantee that this would never happen, can negatively affect TAPI project.

Another problem which stems from the previous two is the financing issue. Though Asian Development Bank is assisting the project but funding from other sources is required which is difficult because international investors are doubtful about the project's success.

Over the past 22 years since the project was first approved by the four nations with the support of international companies, many important regional developments, which should be taken into account when talking about TAPI's implementation, have taken place, a senior oil and gas analyst at Vienna Energy Research Group Dr. Fereydoun Barkeshli said.

He told Azernews that pipelines diplomacy works well only through long-term security and stable regional territories. Therefore, it is important to resolve the issues of geopolitical threats in Afghanistan and Pakistan and then between the two adversaries namely India and Pakistan in order to successfully implement the project.

Barkeshli also noticed that during the last two decades, LNG has found to be less costly and time-consuming compared to building pipelines.

Currently, Pakistan and India are heavily investing in their LNG import infrastructure, thus their enthusiasm to complete TAPI soon is getting diminished. However, once LNG prices increase the TAPI project will regain its competitiveness and actuality, experts say.

This ambitious project has come a long way since it was first proposed in 1993, but it still has a long way to go.

https://www.azernews.az/region/119129.html

Saturday, September 9, 2017

National Highway Toll : "Commercial Vehicles for Toll Plazas in Registered District to be Charged at 50% user fee"

"Commercial Vehicles for Toll Plazas in Registered District to be Charged at 50% user fee"
जिन व्यक्तियों का अपना कमर्शियल व्हीकल (नैशनल परमिट की गाड़ियों को छोड़ कर), उसी जिले में रजिस्टर्ड है, जिस जिले में नेशनल हाईवे का टोल पड़ता है, राष्ट्रीय राजमार्ग फीस (दरों का निर्धारण और संग्रहण) नियमावली 2008 , की धारा 9 , के  उप नियम 3A, के तहत उनको निर्धारित टोल फीस का 50% ही देना है | यानी अगर आपकी बस स्टेट परमिट के अधीन लुधिआना ज़िले में रजिस्टर्ड हैं तो , नेशनल हाईवे पर लुधिअना ज़िले में जितने भी टोल आते है वहां पर आपको टोल का मात्र 50% फीस ही देनी है | यह नियम 12  January 2011 के बाद के सभी टोल कॉन्ट्रैक्ट पर लागू होगा | पंजाब में नैशनल हाईवे के ऊपर 10 टोल प्लाज़ा हैं | एग्रीमेंट और टोल प्लाजा ने फीस किस दिन से शुरू की की पूरी जानकारी आप इस टोल प्लाजा की वेबसाइट (http://tis.nhai.gov.in/) से देख सकते है, NHAI  ने हर टोल प्लाज़ा को एक यूनिक ID दिया हुआ है 

Cricketer Kapil Dev and Fazilka

#ILoveFazilka #1947PartitionStories
After Partition in 1947, Mr. Ram Lal Nikhanj,
father of famous Indian cricketer Kapil Dev, came from Rawalpindi and settled here in Fazilka. He was a Timber trader, later in 1956, he along with his family finally moved to Chandigarh.

A clip from the recent Interview of Kapil Dev Ji, where he narrated the saga of partition

Thursday, September 7, 2017

Hundreds of needy persons benefitted from wall of kindness in Fazilka

FAZILKA: The initiative of neki ki deewar(wall of kindness) is proving beneficial for the needy persons of the border district. A total of 3352 persons have been benefited from the wall in nearly 9 months. Fazilka deputy commissioner Isha Kalia had started the wall of kindnessnear the Shastri Chowk on December 15, 2016 with assistance from District Red Cross Society.

Deputy Commissioner Isha Kalia said that "the purpose behind starting "neki di diwar" is to provide necessary clothes for the poor and needy. The goods which were not used by the people were either thrown or burnt in the garbage but the district administration urged the people to handover these goods for needy persons as it is best to get rid of their household waste. Now general public is coming forward to handover their old clothes and other things which are now being used by the poor and needy persons". She said that by reaching the virtue of the noble wall of the city, many residents of the district have given their old clothes or other things which are further provided to the needy.

She said that whenever people have any extra things, they can send it to the "neki di diwar" and urged the needy people to take these things without hesitation if they need any clothes.

Secretary, Red Cross Society, Subhas Arora, informed that a women employee has been appointed by the Red Cross society to run the wall of virtue. On any working day from 9 AM to 5 PM, residents can deposit their spare clothes and other unutilized things here and the needy people can get the same as per their requirement.

Saturday, September 2, 2017

8 teachers to get national award - Lavjeet Grewal, Fazilka

Tribune News Service
Faridkot, September 1

Eight teachers of government schools in Punjab have been selected for the National Award to Teachers, 2017.

Four of these teachers are from government primary schools and the rest from senior secondary schools in the state. Teachers of government primary schools are Gurjant Singh of Punnawali village (Sangrur), Lavjeet Singh of Dona Nanka (Fazilka), Jaswant Singh of Rajgarh Pakhowal (Ludhiana) and Manmohan Singh of Bhatton (Ropar). In Government Senior Secondary Schools category, the teachers selected are Gopal Krishan of Pakhi Kalan (Faridkot), Sukhdarshan Singh of Kalyan (Patiala), Jatinder Pal Singh of Mahna Singh Road (Amritsar) and Paramjit Singh Kalsi of Aliwal (Gurdaspur).

The awards are given by the President on September 5 to give recognition to meritorious teachers in primary, middle and secondary schools.

Friday, September 1, 2017

90 साल फाजिल्का के सिनेमा का सफर - A 90 Years Journey of Fazilka Cinema

फाजिल्का सिनेमा के सुनहरे इतिहास में आज जुड़ेगा नया अध्याय 
1st September 2017

फाजिल्का के सिनेमा का इतिहास भी देश के सिनेमा के साथ साथ आगे बढ़ा है। डॉक्टर भूपिंदर सिंह बताते है की सन 1921 में जब सुलेमनकी हैड सतलुज दरिया पर बन रहा था तो चलता फिरता सिनेमा फाजिल्का में आना शुरू हो गया था। पाकिस्तान की तरफ से चाननवाला गांव तक लोग पैदल या बैल गाडिय़ों पर बैठ कर आते थे और वहां से ब्रॉड गॉज ट्रेन पकड़ कर सिनेमा देखने फाजिल्का आते थे। 1931 में भारत की पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' आयी और यह चलते सिनेमा का प्रचलन और बढ़ा। बिजली न होने के कारण यह सिनेमा रात को खुले में जनरेटर चला कर फिल्म दिखाया करते थे। डॉ भूपिंदर बताते है की, फाजिल्का के जगन नाथ ग्रोवर ने 'रीगल टॉकीज' के नाम से शुरू किया गया था जो काफी देर तक चला। जहां पुराना राधा स्वामी सत्संग घर होता था, और गौशला के पीछे खाली मैदान में फिल्में दिखाई जाती थी। टिकट का रेट पांच आना, दस आना होता था और प्रतिस्पर्धा इतनी थी की एक टिकट पर तीन फिल्में दिखाई जाती थी। चलते फिरते सिनेमा का दौर राजा सिनेमा के बनने के बाद भी रहा, वह बताते है की उन्होंने एक टिकट लेकर दिलीप कुमार की 'जुगनू', 'मदारी' और 'थीफ आफ बगदाद' फिल्मे चलते सिनेमा में देखी। विजय टॉकी भी इस दौर में काफी मशहूर था। यह कहना गलत नहीं होगा की रीगल और विजय टाल्कीस फाजिल्का के पहले सिनेमा थे जो करीब राजा सिनेमा के बनने से 30 साल पहले से प्रचलित थे ।
आजादी के बाद की बात की जाये तो पहला सिनेमा फाजिल्का में जो आया वह 'सावनसुक्खा' परिवार की बदौलत 'राजा सिनेमा' के रूप में आया। 24 जुलाई 1953 में इसकी शुरुआत फिल्म 'अनारकली' की स्क्रीनिंग से हुई। जो फिल्म देखने आता था उसे लड्डू दिये जाते थे। प्रदीप कुमार, बीना रॉय, नूर जहां जैसे सितारों से जगमगाती फिल्म ने कामयाबी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये। इस फिल्म के गीत 'यह जिंदगी उसी के है, जो इसी का हो गया' ने हिंदी संगीत को नयी कामयाबी की और पहुंचाया, उस समय के कुछ फाजिल्का वासी अपनी यादें तजा करते हुए बताते है , की अक्सर वह टिकट लेकर राजा सिनेमा में सिर्फ गाने के समय सिनेमा जाते थे। 1954 की बात है जब वैजयन्ती माला की 'नागिन' फिल्म राजा सिनेमा में लगी तो बीन की आवाज सुन कर असली सांप हाल के अंदर आ गया था । 1971 की भारत-पाक की जंग हुई तो जो पाकिस्तानी सिपाही पकड़े, उन्होंने माना (आर्मी के रिकॉर्ड में दर्ज है के अनुसार) जब जंग का ऐलान हुआ तब वह चोरी छिपे बॉर्डर पार करके राजा सिनेमा में फिल्म देखने आये थे ।
सिनेमा के 60 व 70 के दशक में सिनेमा का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ा। 1971 की भारत पाकिस्तान जंग के बाद फाजिल्का ने फिर से तरक्की की राह पकड़ी। फाजिल्का की आबादी के लिहाज से और सिनेमा की जरूरत महसूस हुई, फिर फाजिल्का के जमींदार सेठ राजा राम नागपाल ने अपने इकलौते बेटे के नाम पर 'संजीव सिनेमा' खोला। इसमें पहली फिल्म अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, ऋषि कपूर की भारी भरकम स्टारकास्ट वाली मनमोहन देसाई द्वारा निर्देशित फिल्म 'अमर अकबर एंथोनी' से सिनेमा की शुरुआत 23  दिसंबर 1977 को हुई। अब फाजिल्का में दो सिनेमा हो गए थे, और लोगो ने राजा और संजीव सिनेमा को पुराना सिनेमा और नया सिनेमा के नए नाम भी दे दिए। 80 के दशक तक पाकिस्तान में बनी फिल्में भी फाजिल्का में लगती थी, मुझे याद है जब 1956 में बनी पाकिस्तान की ब्लैक एंड वाइट फिल्म 'दुल्ला भट्टी', 18 साल बाद 1983 में  राजा सिनेमा में लगी थी, उसका एक गीत  मुनावर सुल्ताना का गया हुआ 'वास्ता इी रब्ब दा तू जाई वे कबूतरा, चि_ी मेरे ढोल नूं पहुंचाई वे कबूतरा' आज भी बहुत मशहूर है। इस गीत को सुनने के लिए मुझे मेरे पिता जी स्पेशल गीत के समय राजा सिनेमा में लेकर गए। तब मेरी उम्र करीब छह साल थी। 1957 में आई पंजाबी पाकिस्तानी फिल्म 'यकके वाली' ने भी राजा सिनेमा में धूम मचा दी थी । मनोरंजन का साधन सिनेमा ही रहे, और साल में दो-तीन बार स्कूलों से भी बच्चो को फिल्म दिखाने लेकर जाते थे, जो प्रचलन अब शायद बंद या कम हो गया है ।
सिनेमा देखना ही नहीं बल्कि फाजिल्का की प्रतिभाओं ने सिनेमा का निर्माण भी किया। इससे भी बढक़र फिल्म में अभिनय कर भी योगदान दिया। सिनेमा में योगदान की बात की जाये तो मुख्य तौर पर दो लोगों का नाम सामने आता है, 1949 में फाजिल्का की बेटी पदमश्री पुष्प हंस की पहली फिल्म 'अपना देश' आई जिसका निर्देशन उस समय के जाने मानेे निर्देशक वी शांताराम ने किया। इससे पहले उन्होंने 1948 में पंजाबी की हिट फिल्म 'चमन' में 'चन्न किथा गुजारी ए रात वे', गाकर अपनी आवाज का लोहा मनवाया। यह वह दौर था जब शायद लड़कियों को घर से निकलने भी नहीं दिया जाता था पर, फाजिल्का क बेटियां अभिनय और गायकी में अपना सिक्का दुनिया में जमा रही थी ।
इसके बाद 1974 में फाजिल्का के मशहूर उर्दू शायर कुँवर मोहिंदर सिंह बेदी, ने पंजाबी फिल्म 'मन जीते जग जीत' को बतौर निर्माता बनाया । सुनील दत्त की मुख्या भूमिका में यह फिल्म सुपर हिट रही ।
टीवी कुछ एक घरो में था तब, तो फाजिल्का के लोगो को दुनिया को देखने और मायावी नगरी की बातें बॉर्डर तक पहुंचने का सिनेमा ही एक मात्र जरिया रहे। लेकिन 80 के दशक में जब टेलीविजन पर लाइसेंस सिस्टम खतम किया गया और उसके बाद प्रधान मंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में, टेलीविजन घर घर हो गया, उसके बाद वी.सी. आर का दौर आया और 90 तक टीवी ने फाजिल्का में अपनी पकड़ बना ली। फाजिल्का के सिनेमा ने यह सारे दौर देखे 90 और सन 2000 के दशक में सिनेमा को नयी टेक्नोलॉजी की खूब मार पड़ी, जो सिनेमा दर्शको से खचाखच भरे रहते थे वहां से भीड़ नदारद हो गई। एंटरटेनमेंट टैक्स की मार ने सिंगल स्क्रीन सिनेमा की कमर तोड़ दी। लेकिन फाजिल्का के सिनेमा ने अपना वर्चस्व नहीं खोया और अपनी होंद की लड़ाई लड़ता रहा।
पुरानी सदी का अंत और नयी सदी सिनेमा के लिए खुशखबरी लेकर आई, ऑनलाइन टिकट, यूएफओ टेक्नोलॉजी , डिजिटल डॉल्बी के दौर ने डिजिटल सिनेमा की और रुख किया,  सरकार ने  लगने वाले टैक्स कम करके सिनेमा को अपने पैरों पर फिर खड़ा होने का मौका दिया। भीड़ वापिस सिनेमा की तरफ आनी शुरू हुई तब 1994 में हिंदी सिनेमा की दो फिल्म 'दिलवाले दुल्हनियां ले  जायेंगे' और 'हम आपके है कौन' ने सफलता के नए आयाम स्थापित किये। फाजिल्का में यह दोनों फिल्में 7  से 10 हफ्ते से अधिक चली और कई रिकॉर्ड बनाये। करीब 2009-2010  के आस पास आते आते दोनों सिनेमा डिजिटल साउंड के साथ आगे बढ़ते गए, यूएफओ टेक्नोलॉजी के कारण जो फिल्म हिट होने के करीब 1-2 महीने बाद फाजिल्का के सिनेमाघरों में आती थी, पहले हफ्ते ही रिलीज होने लग गई। यादें ताजा करते हुए संजीव सिनेमा के प्रोजेक्टर ऑपरेटर श्री घनश्याम शर्मा जिनकी उम्र अब करीब 73 साल है, वह संजीव सिनेमा से पिछले 40 सालों से जुड़े है, बताते है की उन्होंने सिनेमा से जुड़े वह सारे उतार चढ़ाव देखे है, 'मामला गड़बड़ है', 'नूरी' और कई ऐसी सुपर हिट मूवी आई जिससे सिनेमा में दर्शको की भीड़ इस कदर होती थी कि कुछ लोग उनके साथ प्रोजेक्टर रूम में फिल्म देखते थे। पहली फिल्म 'अमर अकबर एंथोनी' चार हफ्ते चली थी। हर हिट फिल्म को देखने फाजिल्का के सभी परिवार आते थे। गौरतलब है कि रील वाले सिनेमा से लेकर अब राजा व संजीव सिनेमा पूरे डिजिटल दौर में पहुंच चुके है, घनश्याम जी संजीव सिनेमा में आज भी संचालन कर रहे है।
1 सितम्बर 2017 को फाजिल्का के सिनेमा इतिहास के सुनहरी दौर में गिल्होत्रा परिवार एम.आर कार्निवाल सिनेमा जोडक़र एक और अध्याय जोडऩे जा रहा है। दो स्क्रीन वाले, डिजिटल डॉल्बी साउंड व् यूएफओ तकनीक से फाजिल्का का तीसरा और सबसे बड़ा सिनेमा शुरू होने जा रहा है। नवीनतम तकनीक से लेस सिनेमा में अजय देवगन की नयी फिल्म 'बादशाहो' से शुरुआत की जा रही है । गिल्होत्रा परिवार और फाजिल्का को सिनेमा के इस स्वर्णिम दौर में जिसने 90 सालों का सफर तय किया है, दिल से बधाई।

नवदीप असीजा, चंडीगढ़/फाजिल्का
Story Published in Sarhad Kesri, Fazilka

Tuesday, August 29, 2017

Curfew re-imposed in 3 districts : Movement also restricted in Fazilka, Jalalabad and 11 villages of Lambi segment

Gagandeep Sharma
Tribune News Service
Bathinda, August 28

Curfew was re-imposed in Bathinda, Mansa and Faridkot districts at 2 pm today. In Bathinda, however, curfew was relaxed between 7 pm and 10 pm. The district administration will review the situation and decide whether or not curfew should remain enforced.

The police and security forces, meanwhile, carried out flag marches in several districts of Malwa after the CBI Special Court announced 20 years' imprisonment for the Dera Sacha Sauda chief. No incident of violence was reported in Bathinda, Muktsar, Mansa, Faridkot and Barnala districts.

Sources in the police said dera followers in the five districts had gone into hiding after the police had booked them.

Additional Director General of Police (ADGP) HS Sidhu remained in Bathinda throughout the day. Senior Superintendent of Police Naveen Singla said 11 companies of the paramilitary forces had been deployed in Bathinda district.

The Barnala police have arrested a man on the charge of violating Section 144. He has been sent to judicial custody.

Muktsar/Fazilka: Curfew was imposed today in Assembly constituency, and re-imposed in Malout and Abohar. A curfew-like situation prevailed in Muktsar as the police stopped commuters from moving on roads.

The Malout police, meanwhile, seized 34 petrol bombs, sharp-edged weapons and chilli powder from five bags lying abandoned near a marriage palace on the Fazilka-Delhi National Highway.

The damages to public property in Muktsar district during the violence on August 25 have been pegged at Rs10.41 lakh and that to private property at Rs14 lakh.

In Fazilka, the police reportedly forced shopkeepers to shut their shops. But on the intervention of Beopar Mandal president Ashok Gulbadhar, shops remained open till 1.30 pm.

Dampener on festivities

Abohar: With the town under curfew again, the Ganesh Chaturthi celebrations has been cut short. Devotees assembled at Gandhi Grounds here on Monday and performed aarti. At 11.30 am, an announcement was made from police vans that an indefinite curfew would be imposed at 2 pm. To avoid any trouble, devotees collected their belongings and returned before afternoon. — OC

Saturday, August 12, 2017

For Swachh Bharat: Will Punjab be third time lucky on cleanliness? Schools on test now

22 schools from state are among 643 vying for the first national Clean School Awards

After faring poorly in national rankings of cities and railway stations, Punjab will face another cleanliness test soon — in the schools this time.

Twenty-two government elementary and secondary schools are in the race for the first national-level Swachh Vidyalaya Puraskars (Clean School Awards) expected to be announced by the Union human resource development (HRD) ministry in the last week of this month. They are among the 643 government schools vying for top honours for "excellence in sanitation and hygiene practices". The Centre plans to award 100 schools each at elementary and secondary levels.

Punjab's schools in consideration are located in 12 districts with the maximum number of entries being from Fazilka, at five. Three entries are from Ferozepur, two each from Kapurthala, Hoshiarpur, Ludhiana and Tarn Taran, and one each from Nawanshahr (SBS Nagar), Faridkot, Sangrur, Patiala and Mohali.

These schools have been selected by the state education department and the MHRD after they emerged on top in the state on parameters of cleanliness, sanitation, availability of facilities such as toilets, clean and safe drinking water, clean and green campus, hygiene habits among children, and teachers' involvement in ensuring cleanliness.

Puraskar and process

The awards are part of the Swachh Bharat Swachh Vidyalaya (Clean India, Clean School) campaign started by the Narendra Modi-led National Democratic Alliance (NDA) government. The selection process, which was started 10 months ago, saw thousands of schools from across the country submitting their entries and go through a lengthy selection process. Besides Punjab, 25 schools from Haryana, 27 from Himachal Pradesh, 40 from Rajasthan and three from Chandigarh have been shortlisted.

Though Punjab had sent a list of 40 schools to the Centre, 11 primary and secondary schools each have made it to the final round. They are mostly located in rural areas.

Government Senior Secondary School in Dhaliwal Bet village of Kapurthala district, which is spread over four acres and has 350 students, is among them. Principal Mohinder Kaur said her school filled the self-evaluation form online last year. "The school has five parks and lawns with medicinal plants, constant supply of clean drinking water, 10 toilets, and a big auditorium. We take particular care of sanitation," she said.

Hoping for redemption

A school education department official said the HRD ministry has, in collaboration with UNICEF's water, sanitation and hygiene (WASH) team, done its own independent assessment of the recommendations sent by the states. "The final awardees will be selected by a national-level committee headed by the Union secretary, school education. We are hopeful some of our schools will do well, but are keeping our fingers crossed," he said.

Maneesh Garg, joint secretary, school education, MHRD, has, in a letter to the state government, asked to complete the process of giving district- and state-level awards by August 15 and inform the ministry.

Under the Swachh Bharat campaign, the state has been a laggard so far. Not a single city from the state was among the top 100 in rankings released this year due to serious shortcomings in solid waste collection and processing and disposal. Barring the Beas railway station, most other stations in the state also did not do well in cleanliness rankings released three months ago. The Beas station, which was among the cleanest stations, is primarily maintained by Radha Soami Satsang's volunteers.